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Thursday, May 6, 2010

साध अधूरी

आज तो असीम श्याम
ठहर जाइए
भावमय ये विहार
थिर बनाइये
नजर भर निहारने की
साध अधूरी
भाव सुमन सौंप करूँ
आज पूरी
पुष्पांजलि भरे
भाव रागनी
अभीष्ट ईष्ट राधना
की सौदामनी
बिखेर रही राग से
विरागनी प्रसून
sveekariye
पायेगी
बावरी शुकून

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