खजुराहो पर खास लिखें क्या ? खजुराहो है शान हमारी ।
शिल्प-शास्त्र का अनुपम उत्सव, पाषाणों में जान हमारी।
चन्देलों ने अमर किया है कला सहित इस कला सदन को ।
मधुमासी उत्सव नृत्यों का ,बुला रहा फिर रति मदन को ।
भोग -योग का अनुपम संगम ,और अनूठा हृदयंगम ये।
रति-मनोज की नगरी सा भी , त्रिनेत्र शिवधाम सहित ये ।
अध्यात्म प्रस्तर पर उतरा ,गूढ़ रहस्य लिए अपने में ।
शैलानी हतप्रभ रह जाते ,दांत तले उंगली सपने में ।
यह भारत है सारा भारत,जितेन्द्रिय जीवन शैली का।
ऋषियों की पावन धरती पर ,दिव्य देह की देहावली का।
पाषानों में पाठ लिखाहै,कालजयी भाषाशैली में।
अकथनीय कुछ कह नहीं पाए,कथाकार कितने रैली में।
संगीत-गीत शास्त्रीय बजा अब,थिरकन मनहर हरती मन कों।
नृत्य समेट लाये भारत कों,आर्य द्रविण नर्तन संगम कों।
उत्तर दच्छिन अटक- कटक तक,मानचित्र में जान हमारी।
खजुराहो पर खास लिखें क्या,खजुराहो है शान हमारी।
Monday, May 10, 2010
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