चयन करके भिजाया है, तुम्हें विधना ने जगती पर.परम प्रिये प्रेम का सन्देश,सुनाने आज धरती पर।
विषैले सर्प दुश्मन से घिरे हैं आज चारों ओर,बने चन्दन लिए संग संग ,चले प्रिये आज किस पथ पर।
Saturday, May 29, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
"antas ki avaj"
No comments:
Post a Comment